धातु एवं अधातु

जो तत्व इलेक्ट्रॉन को त्याग कर अपना अष्टक पूर्ण करते हैं, धातु कहलाते हैं

धातुओं के सामान्य लक्षण

धातु अधातवर्धनीय कठोर, (सोडियम और पोटेशियम को छोड़ कर) तन्य व चमकदार होती है,धातु को ठोस होती है (hg को छोड़कर), धातु ऊष्मा में विद्युत की सुचालक होती है, धातु ऑक्सीजन से क्रिया कर धात्विक ऑक्साइड बनाती है. धात्विक क्षारीय प्रकृति के होते हैं.

अधातुओं के सामान्य लक्षण

अधातुएं आघातवर्धनीय, मुलायम (कार्बन के रूप में डायमंड को छोड़ कर) तथा भूंगर होती है. अधातुएँ ऊष्मा व विद्युत की कुचालक होती है. (कार्बन के रूप में, ग्रेफाइट को छोड़कर), अधातुए ओक्सीजन से क्रिया कर, अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती है. अधातुएँ जलवा अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं करती है. एक अधिक क्रियाशील अधातु, कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलियन में विस्थापित कर देती है.

धातु कर्म

किसी धातु का इसके अयश्क  से शुद्ध रूप में निष्कर्षण धातु कर्म कहलाता है. धातु कर्म में प्रयुक्त पद निम्न है.

खनिज

किसी धातु के योगिक जो प्रकृति में पाए जाते हैं वे खनिज कहलाते है.

अयश्क

वे खनिज जिनसे धातु व्यापारिक रूप से  निष्कर्षित की जाती है, अयश्क कहलाते है. अत: सभी अयश्क खनिज है किन्तु सभी खनिज अयश्क नही है.

धातु निष्कर्षण  

किसी धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त प्रक्रिया निम्न प्रकार है तोड़ना या पीसना

धातु निष्कर्षण के लिए सर्वप्रथम अय्श्क को तोड़ा एवं पीसा जाता है

अयस्क का सांद्रण

अयश्क  प्रकृति के आधार पर सांद्रण निम्न प्रकार किया जा सकता है - गुरुत्वीय पृथक्करण विधि, ऑक्साइड कथा कार्बोनेट अयश्क के लिए

चुम्बकीय पृथक्करण विधि

चुंबकीय अयश्क  के लिए

फेन प्लवन विधि

सल्फाइड अयश्क  के लिए

रासायनिक विधि

बॉक्साइट अयस्क के लिए

विस्थापन

अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में उनके ग्लानाको को से निम्न  ताप पर गर्म करने को विस्थापन कहते हैं.

भर्जन

अयश्क  को वायु की उपस्थिति  में गर्म करने को भर्जन कहते हैं.

Your Comment


Write First Comment Here