समतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनाना

समतल दर्पण द्वारा सी बिंदी वस्तु का प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, कितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने रखी होती है. यह प्रतिबिंब आभासी होता है तथा वस्तु के बराबर होता है. दर्पण में यदि कोई मनुष्य अपना पूर्ण प्रतिबंध देखना चाहता है तो दर्पण की न्यूनतम ऊंचाई मनुष्य की ऊंचाई क आधी  होनी चाहिए.. यदि कोई व्यक्ति v चाल से दर्पण की ओर चलता है, तो उसे दर्पण में अपना प्रतिबिंब 2v ताल से अपनी ओर आता हुआ दिखाई देगा. समतल दर्पण 0 कोण पर झुके हो, तो उनके द्वारा उनके बीच में रखी वस्तु के बनने कुल प्रतिबिंब की संख्या 360 \ 0 * 1 होती है. यदि यह पूर्णांक नहीं है तो इसका अगला पूर्णांक मान लिया जाता है.

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